Question ListCategory: Hindu Saints | HinduismWhy for Christian missionaries Indian society is very soft target?
2 Answers
Pawan answered 4 years ago

हाल ही में हमारी बात महाराष्ट्र के समाज सेवी आलोक जी (असली नाम गुप्त रखा गया है) से हुई, जिनकी संस्था धर्मान्तरित लोगों की “घर वापसी”, अर्थात ईसाइयों द्वारा धर्मान्तरित हो भटके हुए हिन्दुओं को पुनः अपने मूल धर्म – “हिन्दू धर्म” में सम्मिलित करवाने का पुण्य कार्य करती है| आलोक जी व्यक्तिगत तौर पर नियमित रूप से ऐसे “विवशता वश भटके हुए” हिन्दुओं से जाकर मिलते हैं और उन्हें हिंदुत्व का महत्व तथा “निज धर्म” की महिमा बता कर, अपनी भूली हुई संस्कृति की याद दिला,  अपने हिन्दू धर्म का पालन करने को प्रेरित करते हैं | उनके इस पुण्य कार्य तथा “स्वधर्म पालन” की महत्ता की पुष्टि तो श्रीमद भगवद्गीता के तीसरे अध्याय में उक्त निम्नांकित श्लोक से भी हो जाती है:
श्रेयान् स्वधर्मो विगुणः परधर्मात् स्वनुष्ठितात् ।
स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः ॥३,३५॥
अर्थात : अच्छी तरह से आचरण में लाए हुए दूसरे के धर्म से गुण रहित भी अपना धर्म अति उत्तम है। अपने धर्म में तो मरना भी कल्याणकारक है और दूसरे का धर्म भयावह (भय को देने वाला) है |
आलोक जी द्वारा “धर्मांतरण” के विषय में किये गए गहन अध्यन के अनुसार, धर्मांतरण के लिए वैटिकन, रोम से भारी रकम भारत भेजी जाती है |
कहा जाता है कि विलियम कोलगेट, जिन्होंने कोलगेट टूथपेस्ट का आविष्कार किया था, को बचपन में अनेकों वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था, जिसके फलस्वरूप उन्हें अमेरिका के एक चर्च (गिरिजाघर) ने गोद ले लिया था | “कोलगेट टूथपेस्ट” के आविष्कार के बाद उन्होंने बहुत धन कमाया और जाते जाते अपनी वसीयत में अपनी कमाई का १०% हिस्सा भारत में मिशनरियों के “धर्मांतरण” की परियोजना (“Mass Conversion Project”)  के लिए छोड़ गए थे |
यह बात भी सर्वविदित है कि विश्व के सबसे धनी व्यक्ति – बिल गेट्स भी धर्मांतरण के कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर दान दिया करते हैं |
मिशनरियों के लिए पिछड़े इलाकों में रहने वाला हिन्दू समाज धर्मांतरण हेतु सबसे सरल व उत्तम निशाना है| ऐसे समाज की दरिद्रता व विवशता का लाभ उठा मिशनरियां उन्हें कभी गेहूं, डबल रोटी आदि खाद्य सामग्री , कभी सिलाई मशीन, कभी अदह यानी asbestos की छत, कभी पूरे परिवार के बच्चों के पढाई-लिखाई , यहाँ तक कि लड़कियों के विवाह तक का खर्च वहन करने की ज़िम्मेदारी लेने का प्रलोभन देती हैं ! छत्तीसगढ़ की उडाव जाति का २०% हिन्दू समाज, मिशनरियों की इसी सुनियोजित परियोजना के तहत  ईसाई बन गया है |
इन सब से इस प्रश्न का उत्तर मिल जाता है कि हिन्दू समाज इन मिशनरियों के लिए इतना सरल निशाना यानी “soft target”क्यों है | आलोक जी के मुताबिक़ ईसाइयों व मुसलमानों में अपने धर्म के प्रति जितनी निष्ठा, दृढ़ता व कट्टरता है, वह दुर्भाग्यवश हम हिन्दुओं में नहीं |
भारत में ईसाई मिशनरियों ने अनेकों NGO खोल रखे हैं | इनमें से कईयों ने अपनी संस्थाओं  को हिंदू नाम तक दे दिया है | भारतवासी होते हुए भी क्या हम यह नहीं जानते कि हमारा शासन  कौन कर रहा है या जानकर भी अनजान बनते हैं, और इस हकीकत से मूंह मोड़ लेते हैं ? शायद हम यह भूल जाते हैं कि इस तरह की नकारात्मक प्रतिक्रिया ना सिर्फ़ हमारे लिए अपितु समस्त भारतीयों और आने वाली भावी पीढ़ी के लिए भी घातक है |
आशाराम बापू, एक राष्ट्र संत, जिन्हें उनके भक्त व अनुयायी प्रेम से “बापूजी” भी कहते हैं और  जिन्होंने इस धर्मांतरण के मुद्दे को लेकर खुली जंग की है , जिसका नतीजा तो आज हम सबके सामने है कि किस तरह इस देश के पूजनीय  संत के साथ बर्बरता पूर्ण व्यवहार कर उन्हें जेल में  कैद कर दिया गया | यह प्रहार केवल बापूजी पर ही नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से इस देश पर, इसकी संस्कृति पर और हर उस व्यक्ति पर किया गया है जो इस भारत का इसकी संस्कृति का हिस्सा है |
आज देश भारी विपदा में है, कई निर्दोष संत इन देशद्रोहियों के निशाने बने और बन रहे हैं | यदि अब हिंदू समाज संगठित नहीं होगा तो कब होगा ? कहीं ऐसा न हो कि ईसाइयों की इतनी आक्रामक धर्मांतरण की परियोजना के फलस्वरूप हम अपनी इस अमूल्य धरोहर को लुटा बैठें और अन्त में मात्र अपने हाथ मलते रह जाएँ | अतः इस देश और संस्कृति की रक्षा के लिए आशाराम बापू जी का जेल से बाहर आना अत्यावश्यक है |
आज हम इतने बेपरवाह कैसे हो सकते हैं ? जोधपुर की इस कड़ी धूप में 3-4 घंटो के लिए पूज्य बापू जी को प्रतिदिन न्यायालय जाना पड़ रहा है | जिस तथाकथित “नाबालिग़” पीड़िता ने बापूजी पर इस तरह के बेबुनियाद आरोप  लगाये हैं, उसकी बेतुकी बातें 3-4 घंटे बापूजी को सुननी पड़ रही  हैं |जबकि उपलब्ध सबूत व दस्तावेज़ तो कुछ और ही बयां करते हैं,जैसे – लड़की के शंकर मुमुक्षु विद्या पीठ के प्रमाण पत्र और LIC प्रमाण पत्र के अनुसार वह बालिग है ; और उसके 10 वीं के प्रमाण पत्र के अनुसार लड़की नाबालिग है | लेकिन दुर्भाग्य वश अभी तक भारतीय न्यायव्यवस्था यह निर्णय नहीं कर पायी है कि लड़की बालिग है अथवा नाबालिग तथा इस “बालिग” – “नाबालिग” के चक्कर में तड़ासना मिल रही है – एक निर्दोष संत को |
न्यायालय के हर सत्र के बाद पुलिस बापूजी को कारागार की वज्र गाड़ी में लाती है और वापिस ले जाती है | यह गाड़ी 3 घंटे तपती धूप में खड़ी रहती है | जबकी पुलिस की जीप व अन्य वाहन छाया में खड़े किये जाते हैं  |
बापू जी की उम्र के हिसाब से तथा कष्टप्रद बीमारी “अनंत वात”, जिसमें कभी भी और किसी  भी छोटे – मोटे कारण, यहां तक की दातुन करने, चहरे पर तेल आदि लगाने पर भी भयंकर जानलेवा दर्द होने लगता है, ऐसी अवस्था में बापूजी के साथ यह अमानवीय व्यहार उनके मानवाधिकार का हनन करना है | अतः संत श्री आशारामजी बापू को ज़मानत मिलना अत्यावश्यक है |
अब हम चुप कैसे रह सकते हैं ? जब – जब अंग्रेज़ों और मुसलमानों ने हम पर राज करने के लिए – हमारे देश के धर्म और साधू – संतों पर अत्याचार किया ; और हिंदू समाज चुप रहा,  तब – तब देश को गुलाम बनना पड़ा है | उस समय देश को गुलाम धन, सत्ता और साम्राज्य की लोलुपता वश किया गया था; लेकिन धर्म पर अडिग रहने वालों ने देश को गुलामी की जंजीरों को तोड़ कर उसे आज़ाद करवा लिया था | परन्तु अब तो प्रहार सीधा उसी धर्म पर किया जा रहा है | एक सोची समझी साज़िश के तहत आपका “धर्म” ही बदला जा है | आपसे आपके धर्म और संस्कृति को छीनने के लिए षड्यंत्र पर षड्यंत्र रचे जा रहे हैं, जिसके  तहत पूज्य बापूजी को भी फंसाया गया है |
आखिर हिन्दुओं को हो क्या गया है ? वे चाहते क्या हैं ? अपनी आँखों के सामने अपनी बहन, बेटियों, भाई और बच्चों को चरित्रहीन, व्यभिचारी पशु की तरह देखना चाहते हैं या देश को दुर्व्यसनों से ग्रस्त हो किसी गर्त की खाई में देखना चाहते हैं ? आज सब पर भूत सवार है “कान्वेंट शिक्षा प्रणाली” का, जो हमें दिन प्रतिदिन गुलामी की ओर ले जा रहा है |
जो हमारे रक्षक हैं, जिन्होंने अपना हर पहलू हिंदू धर्म की रक्षा में लगाया है,उन्हें हम हिंदू क्या दे रहे हैं?
भारत के हिन्दुओं –  समय रहते सम्भल जाओ; सावधान हो जाओ और विवशता वश धर्मान्तरित हो चुके भारतीयों को भी जागरूक करो क्योंकि “धर्मो रक्षति, रक्षितः” ||
     स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः

Bhumika Staff replied 4 years ago

Well said

T Nandini answered 4 years ago
  1. Hindus under siege! Your leaders and saints will be systematically eliminated with false charges and propaganda. By the time you realize it, it’ll be too late.
  2. Asharamji Bapu is at the forefront in resisting and stopping religious conversion.
  3. Innocent and gullible Hindus are not able to visualize the invisible mechanism working behind defaming Hindu saints which is part of a massive conspiracy of certain powers that are opposing the Hindus as well as our Hindu nation.
  4. Before this case; Shankracharya of Kanchi Math was arrested under false allegations; and the media publicised him as a murderer. But when he was acquitted not guilty and innocent by the Supreme Court; then no media-organisation apologised for branding him as a murderer.
  5. Sadhvi Pragya Singh has been rotting in jail even without any proof and any charge-sheet for the last six years; only because she is a Hindu saint.
  6. The worst part is that most of the Hindus are taken by secularism as well as some kind of inferiority complex. Therefore they immediately accept the version of media as true and factual. Without any proof or investigation, all of a sudden everyone starts acting like a judge because the media and our films have stuffed rubbish in our minds that if the person happens to be a Hindu saint, he must be corrupt and perverted.

– Dr. Subramanian Swamy, an Eminent Jurisprudent

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